सैलरी — आसान
एक Form 16, एक मकान, सेविंग और FD ब्याज, डिविडेंड, टैक्स-फ्री आय। आय ₹50 लाख से कम।
₹974*
नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए सही ITR-1 या ITR-2 फाइलिंग — हर योग्य कटौती क्लेम की जाती है और रिफंड आने तक ट्रैक किया जाता है। हम Form 16 को आपके AIS और 26AS से मिलाते हैं, दोनों टैक्स रिजीम की तुलना करते हैं, और रिटर्न फाइल करके ई-वेरिफाई भी करते हैं।
₹974* से शुरू*केवल प्रोफेशनल फीस — यह हमारी फाइलिंग सेवा की फीस है; इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की कोई अलग सरकारी फीस नहीं है।
नौकरीपेशा लोग ITR भरकर इनकम टैक्स विभाग को अपनी साल भर की कमाई बताते हैं, कटौतियां क्लेम करते हैं और टैक्स चुकाते हैं। अगर आपकी कमाई सैलरी, एक घर और बैंक ब्याज से है, तो आमतौर पर ITR-1 (सहज) भरना होता है। अगर कैपिटल गेन्स, एक से ज़्यादा घर, विदेश की कमाई या ज़्यादा इनकम है, तो ITR-2 भरना होता है। सही फाइलिंग के लिए Form 16 को AIS और Form 26AS से मिलाना ज़रूरी है, ताकि हर TDS मैच हो और कोई कमाई छूटे नहीं।
एक्सपर्ट की मदद से फाइलिंग, साफ शुरुआती कीमत पर। अपनी आय के हिसाब से प्लान चुनें।
एक Form 16, एक मकान, सेविंग और FD ब्याज, डिविडेंड, टैक्स-फ्री आय। आय ₹50 लाख से कम।
₹974*
आसान प्लान + एक से ज़्यादा Form 16, कमीशन या कॉन्ट्रैक्ट आय, ज़्यादा मकान, पिछले घाटे। आय ₹50 लाख से कम।
₹1,650*
मध्यम प्लान + शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या अन्य संपत्ति पर कैपिटल गेन। पुरानी सैलरी पर राहत (Form 10E) भी।
₹3,450*
*शुरुआती प्रोफेशनल फीस। अंतिम कीमत आपके डॉक्यूमेंट पर निर्भर है और काम शुरू होने से पहले बताई जाती है। “+” का मतलब है कि मुश्किल केस में कीमत ज़्यादा हो सकती है।
नौकरीपेशा व्यक्ति — एक या ज़्यादा एम्प्लॉयर्स से सैलरी पाने वाले और Form 16 रखने वाले कर्मचारी।
घर के मालिक — किराए से आय कमाने वाले या कई हाउस प्रॉपर्टी रखने वाले लोग।
ब्याज से आय वाले लोग — बैंक डिपॉज़िट, सेविंग अकाउंट या अन्य निवेश से आय कमाने वाले।
सैलरी के साथ प्रोफेशनल्स और फ्रीलांसर — जिनकी सैलरी या ब्याज के अलावा भी आय है।
रिटायर्ड कर्मचारी और पेंशनर्स — पेंशन और बचत ब्याज से आय वाले वरिष्ठ नागरिक।
मिसमैच और नोटिस से बचने के लिए हम आपके Form 16, AIS और 26AS को मिलाते हैं।
हम दोनों रिजीम में टैक्स निकालते हैं और जिसमें ज़्यादा टैक्स बचे, उसी में फाइल करते हैं।
80C, 80D, HRA, होम लोन ब्याज और अन्य कटौतियां पूरी तरह क्लेम की जाती हैं।
रिफंड आपके अकाउंट में आने तक हम उसका स्टेटस देखते रहते हैं।
एम्प्लॉयर से Form 16 — वित्त वर्ष में आपने जिन-जिन एम्प्लॉयर्स के साथ काम किया, हर एक से।
PAN और Aadhaar कार्ड — रिटर्न फाइल करने वाले व्यक्ति का।
ईमेल ID और मोबाइल नंबर — OTP से ई-वेरिफिकेशन के लिए, बेहतर हो कि Aadhaar से लिंक हो।
प्रॉपर्टी की जानकारी — किराए की आय, होम लोन ब्याज सर्टिफिकेट और मालिकाना प्रमाण, अगर लागू हो।
बैंक अकाउंट की जानकारी — अकाउंट नंबर, IFSC कोड और ब्याज आय के लिए स्टेटमेंट।
निवेश के प्रूफ — LIC, PPF, ELSS, FD या Section 80C के तहत क्लेम की गई अन्य कटौतियां।
मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम रसीदें — Section 80D के तहत कटौती के लिए।
Form 26AS / AIS — TDS और आय की जांच के लिए, इनकम टैक्स पोर्टल से डाउनलोड करें।
अपना Form 16, ब्याज की जानकारी और प्रॉपर्टी से जुड़े डॉक्यूमेंट अपलोड करें; हमारे टैक्स एक्सपर्ट शुरू करने से पहले सब कुछ जांचते हैं।
हम आपकी कुल आय, कटौतियां (Section 80C, 80D आदि के तहत) और लागू टैक्स की सही गणना करते हैं।
एक पूरा ड्राफ्ट रिटर्न तैयार किया जाता है और हमारे एक्सपर्ट उसकी सही होने और नियमों की जांच करते हैं।
आपकी मंज़ूरी के बाद हम इनकम टैक्स विभाग में आपका ITR ऑनलाइन फाइल करते हैं और ITR-V एक्नॉलेजमेंट भेजते हैं।
प्रक्रिया पूरी करने के लिए हम Aadhaar OTP, नेट बैंकिंग या EVC से रिटर्न ई-वेरिफाई करने में आपकी मदद करते हैं।
विभाग से किसी भी फॉलो-अप, स्पष्टीकरण या नोटिस में हम मदद करते हैं और ईमेल, फोन या WhatsApp पर आपको अपडेट देते रहते हैं।
एक Form 16 और सामान्य कटौतियों वाले केस में फाइलिंग में आमतौर पर 1-3 वर्किंग डे, और कई हाउस प्रॉपर्टी या कई तरह की आय वाले केस में 3-5 वर्किंग डे लगते हैं। विभाग द्वारा रिटर्न प्रोसेस होने के बाद रिफंड आमतौर पर ई-वेरिफिकेशन के कुछ हफ्तों से लेकर एक-दो महीनों में आ जाता है, और रकम आपके अकाउंट में आने तक हम इसे ट्रैक करते हैं।
फाइल करने से पहले Form 16 के आंकड़ों को Form 26AS और AIS से न मिलाना।
HRA, 80C या अन्य कटौतियों के प्रमाण न रखना, जिससे बाद में स्क्रूटिनी में दिक्कत हो।
अपने असली आंकड़ों पर दोनों की तुलना किए बिना ओल्ड या न्यू टैक्स रिजीम चुन लेना।
सेविंग अकाउंट का ब्याज या अन्य छोटी आय बताना भूल जाना, जो फिर भी टैक्स योग्य आय में गिनी जाती है।
जिस भी व्यक्ति की कुल आय बेसिक छूट सीमा से ज़्यादा है, उसे ITR फाइल करना ज़रूरी है। आय सीमा से कम हो तब भी फाइल करने से रिफंड क्लेम करने, नुकसान आगे ले जाने और वीज़ा, लोन या क्रेडिट के लिए वैध फाइनेंशियल रिकॉर्ड रखने में मदद मिलती है।
जिन नौकरीपेशा लोगों की आय सैलरी, एक हाउस प्रॉपर्टी और ब्याज जैसे अन्य स्रोतों से है, वे आमतौर पर ITR-1 (सहज) भरते हैं, बशर्ते कुल आय तय सीमा के अंदर हो। कैपिटल गेन्स, एक से ज़्यादा हाउस प्रॉपर्टी, विदेशी संपत्ति या आय, या ITR-1 सीमा से ज़्यादा आय वालों को आमतौर पर ITR-2 भरना होता है।
हां, नौकरीपेशा Form 16 से ऑनलाइन रिटर्न फाइल कर सकते हैं। लेकिन एक्सपर्ट की मदद से गणना सही होती है, कटौतियां सही लगती हैं और इनकम टैक्स विभाग से नोटिस या मिसमैच से बचाव होता है।
नौकरीपेशा आमतौर पर हर साल रिटर्न फाइल करते समय वह रिजीम चुन सकते हैं जिसमें टैक्स कम बने, क्योंकि बिना बिज़नेस इनकम वाले टैक्सपेयर्स के लिए यह चुनाव हमेशा के लिए तय नहीं होता।
समय पर ITR भरने के फायदे: टैक्स रिफंड मिलता है, नुकसान आगे ले जा सकते हैं, और लेट फीस या पेनल्टी नहीं लगती। वीज़ा, लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए भी अक्सर ITR की कॉपी इनकम प्रूफ के रूप में मांगी जाती है।
कई एम्प्लॉयर्स, प्रॉपर्टी और ब्याज से हुई आय को जोड़कर साल का एक सही रिटर्न फाइल किया जा सकता है, जिसमें सभी TDS क्रेडिट सही से मैच किए जाते हैं।
मूल फाइलिंग की किसी छूट या गलती को सुधारने के लिए आप लागू डेडलाइन से पहले Section 139(5) के तहत रिवाइज़्ड रिटर्न फाइल कर सकते हैं।
आपको ये चाहिए: Form 16, PAN, Aadhaar, बैंक अकाउंट की जानकारी, निवेश के प्रूफ, किराए की रसीदें (अगर हों) और ब्याज की कमाई की जानकारी। सब कुछ सही है या नहीं, यह जांचने के लिए हम Form 26AS और AIS देखते हैं।
जमा करने के बाद आपको ITR-V एक्नॉलेजमेंट मिलता है, जिसे फाइलिंग पूरी करने के लिए तय समय में ऑनलाइन (Aadhaar OTP, नेट बैंकिंग या EVC से) वेरिफाई करना ज़रूरी है।
हां। आखिरी तारीख निकलने के बाद भी, असेसमेंट ईयर खत्म होने से पहले लेट फीस के साथ बिलेटेड रिटर्न भरा जा सकता है। कुछ शर्तों पर पिछले कुछ सालों का अपडेटेड रिटर्न भी भरा जा सकता है।
एक Form 16 वाले सामान्य सैलरी केस में आमतौर पर 1-3 वर्किंग डे, और कई हाउस प्रॉपर्टी या कई तरह की आय वाले केस में 3-5 वर्किंग डे।
बिज़नेस, प्रोफेशन या फ्रीलांसिंग से आय के लिए।
TDS काटने वाले एम्प्लॉयर्स और बिज़नेस के लिए।
नोटिस या मिसमैच की क्वेरी मिली है? जवाब हम संभालते हैं।
यह आपकी कटौतियों पर निर्भर है। अगर आप HRA, 80C और होम लोन का ब्याज क्लेम करते हैं, तो ओल्ड रिजीम अक्सर सस्ता पड़ता है। कम कटौतियां हों तो न्यू रिजीम बेहतर है। हम दोनों में टैक्स निकालकर वही चुनते हैं जिसमें टैक्स कम बने।
हां, TDS कटने से फाइलिंग की ज़रूरत खत्म नहीं होती — पहले से भरे टैक्स का मिलान करने और कोई रिफंड बनता हो तो उसे क्लेम करने के लिए आपको रिटर्न फाइल करना होगा।